वादों की भरमार, ज़मीन पर सन्नाटा — फडणवीस की सभा पर तीखी प्रतिक्रिया

ब्रेकिंग न्यूज़
Vasai-Virar
11 जनवरी 2026, 12:18 PM
48 व्यूज
admin
admin
Editor
वादों की भरमार, ज़मीन पर सन्नाटा — फडणवीस की सभा पर तीखी प्रतिक्रिया

वादों की भरमार, ज़मीन पर सन्नाटा — फडणवीस की सभा पर तीखी प्रतिक्रिया

विरार (मयंक रावत) : वसई-विरार म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव के प्रचार के सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नालासोपारा में हुई सार्वजनिक सभा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नेताओं द्वारा दी गई विकास की “स्क्रिप्ट” को जस का तस पढ़ते हुए मुख्यमंत्री ने ऐसे वादे किए, जिनका ज़मीनी हक़ीक़त से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं दिखा। भाषण के दौरान भाजपा की अब तक वसई-विरार महानगरपालिका न जीत पाने की कुंठा साफ दिखाई दी। इसी झुंझलाहट में मुख्यमंत्री के मुंह से “उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंको” जैसे असंयमित और भड़काऊ शब्द निकलना, एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

विकास की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने सूर्या वॉटर सप्लाई योजना का श्रेय लेने की कोशिश की, जबकि यह योजना वर्ष 1998 में अस्तित्व में आई थी। यह भी जगज़ाहिर है कि इस योजना के दूसरे चरण को हरी झंडी किसके कार्यकाल में मिली। बहुजन विकास अघाड़ी के लोकनेता हितेंद्र ठाकुर की आलोचना करने से पहले मुख्यमंत्री को यह याद रखना चाहिए कि ठाकुर ने वसई तालुका के विकास के लिए हर सरकार के साथ सहयोग की भूमिका निभाई है। उनके तीन विधायक सरकार में एसोसिएट मेंबर के रूप में कार्यरत रहे, यह तथ्य भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पिछले छह वर्षों से वसई-विरार महानगरपालिका में प्रशासकीय राज चल रहा है। सवाल यह है कि इस दौरान नियुक्त कमिश्नर और प्रशासकीय अधिकारी किन मंत्रियों की सिफ़ारिश पर आए? इस अवधि में बुनियादी सुविधाएं—सड़क, पानी, स्वास्थ्य—क्यों बदहाल हो गईं? जनता यह जानना चाहती थी कि भ्रष्टाचार की जड़ें किसके शासनकाल में मज़बूत हुईं, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस पर चुप्पी साधे रखी।

मुख्यमंत्री रहते हुए देवेंद्र फडणवीस मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को उनका हक़ का घर नहीं दिला पाए। बेघर हुए कई परिवार सस्ते आवास की तलाश में वसई तालुका आए। इन लोगों को बुनियादी सुविधाएं बहुजन विकास अघाड़ी के प्रयासों से मिलीं। ऐसे में आज विकास के सपने दिखाना लोगों को गुमराह करने जैसा है।वर्तमान भाजपा विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाए गए अवैध निर्माण के मुद्दे के बाद 49 प्रतिशत निर्माण को बिना अनुमति बताकर कार्रवाई शुरू की गई। यह कार्रवाई किनके इशारे पर हुई, यह भी जनता जानती है। तीस वर्ष पहले वसई तालुका की स्थिति क्या थी और आज क्या है—इसका श्रेय किसे जाता है, यह यहां के नागरिकों को बताने की ज़रूरत नहीं। “अप्पा” हितेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में ही यहां पानी, सड़क और बुनियादी ढांचा खड़ा हुआ। यह जनता द्वारा मानी हुई सच्चाई है।

बहुजन विकास अघाड़ी द्वारा विरार-नालासोपारा के बीच अलकापुरी रेलवे स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया। सेंट्रल रेलवे के साथ इसके लिए लगातार फॉलो-अप किया गया। अब जब यह प्रयास सफल होने की दिशा में है, तो मुख्यमंत्री द्वारा इसका श्रेय लेने की कोशिश राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है। तालुका में आज भी गरीबों को समय पर राशन नहीं मिलता। जनसंख्या के अनुपात में राशन दुकानों की संख्या बेहद कम है। सवाल यह है कि अब तक नई दुकानों को मंज़ूरी क्यों नहीं दी गई? ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, अंबरनाथ, बदलापुर और नवी मुंबई में भाजपा के कुप्रबंधन और लोगों पर हो रहे अन्याय किसी से छिपे नहीं हैं। वसई में ऐसे प्रयोग स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

आरोप है कि मुंबई से सटे वसई तालुका के विकास को जानबूझकर रोका जा रहा है, ताकि अन्य क्षेत्रों में बिल्डर लॉबी को लाभ पहुंचाया जा सके। यदि वसई का बड़े पैमाने पर विकास हुआ, तो मुंबई के लोग स्वाभाविक रूप से यहां बसना पसंद करेंगे—और यही डर कुछ लोगों की नीतियों में साफ दिखाई देता है। रेलवे, पोस्ट ऑफिस और अन्य सरकारी संस्थानों की बिगड़ती हालत इस बात का प्रमाण है कि मौजूदा शासन का विकास मॉडल आम जनता नहीं, बल्कि चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। ऐसे में सवाल यही है—BJP का विकास आखिर किसके लिए है?