वसई में प्रभाग संख्या 22 के निर्दलीय प्रत्याशी संजय पांडे को सर्वधर्मीय समर्थन
वसई में प्रभाग संख्या 22 के निर्दलीय प्रत्याशी संजय पांडे को सर्वधर्मीय समर्थन
संवाददाता मयंक रावत
वसई: वसई–विरार क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। नालासोपारा के विधायक की कथित दोहरी नीति से आहत होकर अब वे अपने अधिकारों और जनता की आवाज़ के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे हैं। खास बात यह है कि उन्हें सभी धर्मों और वर्गों से व्यापक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
संजय पांडे की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर सदैव पार्टी और जनता के हितों को प्राथमिकता दी। वर्षों तक उन्होंने पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ उसके सिद्धांतों और नीतियों को ईमानदारी से आगे बढ़ाया। वसई–विरार क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं—जैसे पानी की उपलब्धता, सड़कों की बदहाली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं—पर उन्होंने लगातार प्रभावी ढंग से आवाज़ उठाई। उनके निरंतर प्रयासों से कई विकास परियोजनाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ीं, जिससे जनता का विश्वास और मजबूत हुआ।
इसी कड़ी में वसई पूर्व में अपने सामाजिक कार्यों से पहचान बना चुके संजय पांडे ने प्रभाग संख्या 22 ड से अपना नामांकन दाखिल किया है। उनका चुनाव चिन्ह “बल्लेबाज” है। उनके साथ इसी पैनल में पूर्व नगरसेविका विमल मोहन पाटिल भी चुनावी मैदान में हैं, जिनका चुनाव चिन्ह “मोमबत्ती” है। दोनों उम्मीदवार अपने-अपने प्रभाग में घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं और उन्हें जनता का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
संजय पांडे का कहना है कि उनका उद्देश्य जाति-पात से ऊपर उठकर प्रभाग 22 का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि क्षेत्र के नागरिकों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय स्तर पर समग्र विकास हो। उनका प्रसिद्ध नारा है—
“जात न पात, संजय पांडे सबके साथ।”
संजय पांडे और विमल पाटिल ने बताया कि उन्हें इलाके में सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में पूर्व शिवसैनिक सैलु गोलवंकर सहित उनके पूरे परिवार ने भी संजय पांडे को अपना समर्थन दिया है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—सभी सर्वधर्मीय समुदायों के लोग आज संजय पांडे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।