विधानसभा में गूंजा वसई-विरार का बाढ़ संकट: विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने नाला सफाई घोटाले और लापरवाह अधिकारियों पर साधा निशाना

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Vasai-Virar
03 जुलाई 2026, 08:28 AM
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विधानसभा में गूंजा वसई-विरार का बाढ़ संकट: विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने नाला सफाई घोटाले और लापरवाह अधिकारियों पर साधा निशाना
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विधानसभा में गूंजा वसई-विरार का बाढ़ संकट: विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने नाला सफाई घोटाले और लापरवाह अधिकारियों पर साधा निशाना

विधानसभा में गूंजा वसई-विरार का बाढ़ संकट: विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने नाला सफाई घोटाले और लापरवाह अधिकारियों पर साधा निशाना

वसईकरों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग; सरकार ने 15 दिन में शहर अभियंता नियुक्ति और 8 दिन में जांच रिपोर्ट का दिया आश्वासन

 (मयंक रावत)

वसई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में वसई विधानसभा की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने वसई-विरार में हर वर्ष आने वाली भीषण बाढ़ की समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए वसई-विरार महानगरपालिका के कामकाज, नाला सफाई में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वसईकरों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

विधायक ने कहा कि वसई-विरार में अब बारिश राहत नहीं, बल्कि लोगों के लिए अभिशाप बन चुकी है। उन्होंने बताया कि मात्र चार घंटे की बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो जाता है, सड़कें नदी में बदल जाती हैं, वाहन बह जाते हैं और जनजीवन पूरी तरह ठप हो जाता है। यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और गलत योजना का परिणाम है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महानगरपालिका के गठन के 16 वर्ष बाद भी शहर में समग्र भूमिगत सीवर व्यवस्था और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया। वहीं, नीरी (NEERI) द्वारा करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर तैयार की गई बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट भी आज तक लागू नहीं की गई। प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम भी नहीं उठाए गए।

"हर मां को बच्चे की चिंता सताती है"

सदन में भावुक होते हुए विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि बारिश शुरू होते ही वसई की हर मां को यह डर सताता है कि उसका बच्चा स्कूल से सुरक्षित घर लौट पाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति किसी भी प्रशासन के लिए शर्मनाक है।

सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें

चार वर्षों से रिक्त शहर अभियंता के पद पर तत्काल योग्य अधिकारी की नियुक्ति तथा वर्तमान प्रभारी अभियंता को निलंबित किया जाए।

नाला सफाई में हुए कथित करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की एसीबी से जांच कराई जाए।

नीरी की सभी सिफारिशों को तत्काल लागू कर बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

वसई के लगभग 3,000 प्राकृतिक होल्डिंग पॉन्ड (बावखल) के संरक्षण के लिए अलग नीति बनाई जाए।

नाला सफाई घोटाले पर उठाए गंभीर सवाल

विधायक ने दावा किया कि मीरा-भाईंदर में जिस मशीन का 10 घंटे का किराया करीब 8 हजार रुपये है, उसी मशीन का वसई-विरार में एक घंटे का किराया 8 हजार रुपये दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि केवल नालों की सफाई की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि निविदा प्रक्रिया, भुगतान, दर निर्धारण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में नाला सफाई और बाढ़ प्रबंधन में कथित अनियमितताएं हुईं, वही अधिकारी वर्तमान में नगर विकास विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे संभव होगी?

सरकार ने दिए ये आश्वासन

नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ ने सदन में जवाब देते हुए विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीर मानते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं.

15 दिनों के भीतर वसई-विरार महानगरपालिका में सक्षम शहर अभियंता की नियुक्ति की जाएगी।

नाला सफाई कार्यों की 8 दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर विभिन्न योजनाओं से आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाएगी।

इस दौरान वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी विधायक स्नेहा दुबे पंडित के मुद्दों का समर्थन करते हुए नाला सफाई मामले की जांच रिपोर्ट आठ दिनों में सदन के पटल पर रखने की मांग की।

चर्चा के अंत में विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि वसईकरों की जान से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, बाढ़ मुक्त और सुनियोजित वसई-विरार के लिए वह विधानसभा से लेकर जनता के बीच लगातार आवाज उठाती रहेंगी।