शराब से मिलने वाले आबकारी राजस्व का 11% देशी गायों के संरक्षण पर खर्च करने की मांग

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Vasai-Virar
23 जुलाई 2026, 07:11 PM
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शराब से मिलने वाले आबकारी राजस्व का 11% देशी गायों के संरक्षण पर खर्च करने की मांग
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शराब से मिलने वाले आबकारी राजस्व का 11% देशी गायों के संरक्षण पर खर्च करने की मांग

शराब से मिलने वाले आबकारी राजस्व का 11% देशी गायों के संरक्षण पर खर्च करने की मांग

नालासोपारा : परिवर्तन फाउंडेशन के सचिव शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य में शराब से प्राप्त होने वाले आबकारी राजस्व का 11 प्रतिशत हिस्सा देशी गायों के संरक्षण, संवर्धन, वैज्ञानिक अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए स्थायी रूप से आरक्षित करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार को आबकारी विभाग के माध्यम से मद्य बिक्री से हर वर्ष बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। इस राजस्व का 11 प्रतिशत भाग देशी गायों के संरक्षण, पालन-पोषण, अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना तथा गोपालकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने पर खर्च किया जाना चाहिए। सोमवंशी ने बताया कि वर्तमान में राज्य में देशी गायों के अनुसंधान का प्रमुख केंद्र केवल पुणे में है। जबकि विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र, कोंकण सहित अन्य क्षेत्रों में इस प्रकार के अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने राज्य के प्रत्येक विभाग में ऐसे केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पत्र में कहा कि भारतीय देशी गाय कृषि संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। यदि देशी नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, नस्ल सुधार, गोशालाओं को सहायता और पशुपालकों को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो राज्य में पशुधन विकास को नई गति मिलेगी।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय संस्कृति में 11 अंक को शुभ माना जाता है। इसी आधार पर मद्य से प्राप्त आबकारी राजस्व का 11 प्रतिशत हिस्सा देशी गायों के अनुसंधान, संरक्षण, पालन-पोषण और प्रशिक्षण के लिए स्थायी रूप से आरक्षित करने का निर्णय राज्य सरकार को लेना चाहिए।

परिवर्तन फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री से इस मांग पर सकारात्मक विचार करते हुए महाराष्ट्र के सभी विभागों में देशी गायों के अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने की अपील की है।