मुंबई में पद्मश्री डॉ. रत्नाप्पाण्णा कुंभार की 117वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई
मुख्य बिंदु:
मुंबई में पद्मश्री डॉ. रत्नाप्पाण्णा कुंभार की 117वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई
मुंबई में पद्मश्री डॉ. रत्नाप्पाण्णा कुंभार की 117वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई
लोक रत्न पुरस्कार से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली हस्तियों का सम्मान
मुंबई: देशभक्त पद्मश्री डॉ. रत्नाप्पाण्णा कुंभार की 117वीं जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई के दादर-माटुंगा सांस्कृतिक केंद्र, माटुंगा पश्चिम में उत्साहपूर्वक मनाई गई। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
डॉ. रत्नाप्पाण्णा कुंभार का जन्म 15 सितंबर 1909 को निमशिरगांव, तहसील शिरोळ, जिला कोल्हापुर में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन के दौरान कई बार जेल भी गए। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे छह बार विधायक तथा दो बार सांसद रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई संस्थाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके सामाजिक, शैक्षणिक और देशसेवा के कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से संयोजन समिति द्वारा प्रतिवर्ष जयंती समारोह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली हस्तियों को ‘लोक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उद्यमी दत्ताजी रसाळकर, अखिल भारतीय प्रजापती महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक आर.बी.के. प्रजापति, कर्नाटक के बीदर से पूर्व केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा, रत्नाप्पा कुंभार प्रतिष्ठान की अध्यक्षा रजनीताई मगदूम, भारतीय समता समाज पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव प्रजापति, विधानसभा उपाध्यक्ष के ओएसडी श्रीकांत पंडित, मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एडवोकेट चंद्रकांत शंकर निकम, लिज्जत पापड़ कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश कोते, महाराष्ट्र वाहतूक सेना के अध्यक्ष उदय दळवी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा अखिल भारतीय प्रजापती महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नागनाथ अण्णा कुंभार, कर्नाटक के मल्लिकार्जुन कुंभार, गोवा के रवींद्र नांदेडकर दादासाई, डॉ. सुरेश काळे, मोहन कुंभार, जगदीश मोरे, एकनाथ सुकुम, संतोष चौलकर, गजानन चौलकर, भास्कर कल्याणकर, अण्णा अष्टेकर, रवींद्र दरेकर सहित अनेक समाजसेवी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजन समिति के अध्यक्ष महेश सायकर, कार्याध्यक्ष संजय गिरकर, सचिव रमाकांत गोरे, कोषाध्यक्ष प्रभू गोरे, उपाध्यक्ष विष्णू मळेवाडकर एवं सूर्यकांत कुंभार के साथ कार्यकारी सदस्यों जितेंद्र पाबरेकर, सुरेश बोरसे, रामदास कुंभार, रमेश प्रजापती, अनंत महाडकर, वासुदेव कामणकर, रवींद्र रातवडकर, राजेंद्र वाटेगावकर, रामदास सांगवेकर, चनबस वायकर, यशवंत शेदुलकर, अशोक प्रजापती, लक्ष्मण कुंभार, विजय मांडाळकर, हरिराम प्रजापती, अनिल चिपळूणकर और विश्वास नांदगावकर सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।